• 23/10/2022

CG के 5 लाख अधिकारी कर्मचारियों को नहीं मिली सैलरी, पूर्व मंत्री ने कहा- बगैर वेतन कर्मियों की कैसे मनेगी दिवाली

CG के 5 लाख अधिकारी कर्मचारियों को नहीं मिली सैलरी, पूर्व मंत्री ने कहा- बगैर वेतन कर्मियों की कैसे मनेगी दिवाली
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छत्तीसगढ़ के करीब 5 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला. कर्मचारियों को दिवाली से पहले वेतन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त विभाग से इस संबंध में आदेश जारी नहीं हुए. बहरहाल हर महीने की 1 तारीख को कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी नेता ने कर्मचारियों को वेतन न मिलने पर सरकार पर निशाना साधा है.

बीजेपी नेता एवं पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दीपावली के 2 दिन बचे हैं और छत्तीसगढ़ सरकार की नाकामी की वजह से राज्य के कर्मचारियों और अधिकारियों को अब तक वेतन नहीं मिल पाया है. जिसकी वजह से कर्मचारियों में नाराजगी और मायूसी है.

पूर्व मंत्री ने कहा कि देश के सबसे बड़े त्योहार दीपावली के लिए सभी तरफ उत्साह का माहौल है, लेकिन छत्तीसगढ़ सहित बस्तर संभाग में अभी तक कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है. त्योहार के समय वेतन न मिलने से कर्मचारियों के परिवार पर आर्थिक संकट आ पड़ा है. लेकिन राज्य सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है.

बीजेपी नेता ने कहा कि राज्य सरकार संवेदनशून्य हो चुकी है. ऐसी सरकार जो अपने प्रदेश की जनता का सुख-दुख न समझ सके उसे पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार ही नहीं है. सरकार जल्द से जल्द कर्मचारियों का वेतन जमा करे, ताकि सभी लोग खुशी खुशी त्योहार मना सकें.

केदार कश्यप ने कहा है कि भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़ कर्मचारियों को लगभग 5500 करोड़ रुपये के लाभ से वंचित किया है. साल 2019 से कर्मचारियों को केन्द्र द्वारा घोषित महंगाई भत्ता नहीं दिया गया. साथ ही कर्मचारियों के आंदोलन के बाद जब महंगाई भत्ता 5 प्रतिशत बढ़ा कर दिया गया तो इससे पूर्व के तीन साल का महंगाई भत्ता से उन्हें वंचित कर दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार में इस राशि को GPF में जमा कर दिया जाता था, जो कि रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को एक बढ़ी राशि के रूप में काम आता था.

पूर्व मंत्री ने कहा कि इसी प्रकार आवास भाड़ा भत्ता सातवें वेतनमान अनुसार मिलना चाहिए, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने यहां पर भी कर्मचारियों का गला दबाया है. प्रति महीन तीन हज़ार रूपये का नुक़सान कर लगभग कर्मचारियों का डेढ़ हज़ार करोड़ रुपया का नुक़सान किया है. उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज़्यादा नुक़सान पेंशनधारियों को हो रहा है. जो अपनी आवाज़ उठाने असमर्थ है.

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